सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 2862

नंबर 2862किताब 56, नंबर 78
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كَانَ بِالْمَدِينَةِ فَزَعٌ، فَاسْتَعَارَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَرَسًا لأَبِي طَلْحَةَ، يُقَالُ لَهُ مَنْدُوبٌ فَرَكِبَهُ، وَقَالَ ‏ "‏ مَا رَأَيْنَا مِنْ فَزَعٍ، وَإِنْ وَجَدْنَاهُ لَبَحْرًا ‏"‏‏.‏
Narrated Anas bin Malik:There was a feeling of fright in Medina, so the Prophet (ﷺ) borrowed a horse called Mandub belonging 'to Abu Talha and mounted it. (On his return), he said, "I did not see anything of fright and I found this horse very fast

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।