सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 2855

नंबर 2855किताब 56, नंबर 71
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا مَعْنُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا أُبَىُّ بْنُ عَبَّاسِ بْنِ سَهْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ كَانَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي حَائِطِنَا فَرَسٌ يُقَالُ لَهُ اللُّحَيْفُ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ وَقَالَ بَعْضُهُمُ اللُّخَيْفُ
Narrated Sahl:In our garden there was a horse belonging to the Prophet (ﷺ) called Al-Luhaif or Al-Lukhaif

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।