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सहीह बुख़ारी

नंबर 2843

नंबर 2843किताब 56, नंबर 59
حَدَّثَنَا أَبُو مَعْمَرٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ، قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو سَلَمَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي بُسْرُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنِي زَيْدُ بْنُ خَالِدٍ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ جَهَّزَ غَازِيًا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَقَدْ غَزَا، وَمَنْ خَلَفَ غَازِيًا فِي سَبِيلِ اللَّهِ بِخَيْرٍ فَقَدْ غَزَا ‏"‏‏.‏
Narrated Zaid bin Khalid:Allah's Messenger (ﷺ) said, "He who prepares a Ghazi going in Allah's Cause is given a reward equal to that of) a Ghazi; and he who looks after properly the dependents of a Ghazi going in Allah's Cause is (given a reward equal to that of) a Ghazi

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।