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सहीह बुख़ारी

नंबर 2828

नंबर 2828किताब 56, नंबर 44
حَدَّثَنَا آدَمُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا ثَابِتٌ الْبُنَانِيُّ، قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كَانَ أَبُو طَلْحَةَ لاَ يَصُومُ عَلَى عَهْدِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِنْ أَجْلِ الْغَزْوِ، فَلَمَّا قُبِضَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم لَمْ أَرَهُ مُفْطِرًا، إِلاَّ يَوْمَ فِطْرٍ أَوْ أَضْحَى‏.‏
Narrated Anas bin Malik:In the life-time of the Prophet, Abu Talha did not fast because of the Jihad, but after the Prophet (ﷺ) died I never saw him without fasting except on `Id-ul-Fitr and `Id-ul-Adha

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।