सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 2826

नंबर 2826किताब 56, नंबर 42
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رضى الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَضْحَكُ اللَّهُ إِلَى رَجُلَيْنِ يَقْتُلُ أَحَدُهُمَا الآخَرَ يَدْخُلاَنِ الْجَنَّةَ، يُقَاتِلُ هَذَا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَيُقْتَلُ، ثُمَّ يَتُوبُ اللَّهُ عَلَى الْقَاتِلِ فَيُسْتَشْهَدُ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira: Allah's Messenger (ﷺ) said, "Allah welcomes two men with a smile; one of whom kills the other and both of them enter Paradise. One fights in Allah's Cause and gets killed. Later on Allah forgives the killer who also gets martyred (in Allah's Cause)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।