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सहीह बुख़ारी

नंबर 2818

नंबर 2818किताब 56, नंबर 34
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو، حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ سَالِمٍ أَبِي النَّضْرِ، مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ وَكَانَ كَاتِبَهُ قَالَ كَتَبَ إِلَيْهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي أَوْفَى ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ وَاعْلَمُوا أَنَّ الْجَنَّةَ تَحْتَ ظِلاَلِ السُّيُوفِ ‏"‏‏.‏ تَابَعَهُ الأُوَيْسِيُّ عَنِ ابْنِ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ‏.‏
Narrated `Abdullah bin Abi `Aufa:Allah's Messenger (ﷺ) said, "Know that Paradise is under the shades of swords

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।