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सहीह बुख़ारी

नंबर 2774

नंबर 2774किताब 55, नंबर 37
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ، قَالَ سَمِعْتُ أَبِي، حَدَّثَنَا أَبُو التَّيَّاحِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ لَمَّا قَدِمَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْمَدِينَةَ أَمَرَ بِالْمَسْجِدِ وَقَالَ ‏ "‏ يَا بَنِي النَّجَّارِ ثَامِنُونِي بِحَائِطِكُمْ هَذَا ‏"‏‏.‏ قَالُوا لاَ وَاللَّهِ لاَ نَطْلُبُ ثَمَنَهُ إِلاَّ إِلَى اللَّهِ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:When Allah's Messenger (ﷺ) came to Medina, he ordered that a mosque be built. He said, "O Bani An- Najjar! Suggest me a price for the garden of yours." They replied, "By Allah, we will not ask its price except from Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · Wills and Testaments (Wasaayaa)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।