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सहीह बुख़ारी

नंबर 2771

नंबर 2771किताब 55, नंबर 34
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ أَمَرَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِبِنَاءِ الْمَسْجِدِ فَقَالَ ‏ "‏ يَا بَنِي النَّجَّارِ ثَامِنُونِي بِحَائِطِكُمْ هَذَا ‏"‏‏.‏ قَالُوا لاَ‏.‏ وَاللَّهِ لاَ نَطْلُبُ ثَمَنَهُ إِلاَّ إِلَى اللَّهِ‏.‏
Narrated Anas:When the Prophet (ﷺ) ordered that the mosque be built, he said, "O Bani An-Najjar! Suggest to me a price for this garden of yours." They replied, "By Allah! We will demand its price from none but Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · Wills and Testaments (Wasaayaa)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।