حَدَّثَنَا خَلاَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا مَالِكٌ، حَدَّثَنَا طَلْحَةُ بْنُ مُصَرِّفٍ، قَالَ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أَوْفَى ـ رضى الله عنهما ـ هَلْ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَوْصَى فَقَالَ لاَ. فَقُلْتُ كَيْفَ كُتِبَ عَلَى النَّاسِ الْوَصِيَّةُ أَوْ أُمِرُوا بِالْوَصِيَّةِ قَالَ أَوْصَى بِكِتَابِ اللَّهِ.
Narrated Talha bin Musarrif:I asked `Abdullah bin Abu `Aufa "Did the Prophet (ﷺ) make a will?" He replied, "No," I asked him, "How is it then that the making of a will has been enjoined on people, (or that they are ordered to make a will)?" He replied, "The Prophet (ﷺ) bequeathed Allah's Book (i.e. Qur'an)
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।