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सहीह बुख़ारी

नंबर 2720

नंबर 2720किताब 54, नंबर 9
حَدَّثَنَا مُوسَى، حَدَّثَنَا جُوَيْرِيَةُ بْنُ أَسْمَاءَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ أَعْطَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَيْبَرَ الْيَهُودَ أَنْ يَعْمَلُوهَا وَيَزْرَعُوهَا، وَلَهُمْ شَطْرُ مَا يَخْرُجُ مِنْهَا‏.‏
Narrated `Abdullah bin `Umar:Allah's Messenger (ﷺ) gave the land of Khaibar to the Jews on the condition that they would work on it and cultivate it and they would get half of its yield

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · Conditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।