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सहीह बुख़ारी

नंबर 2697

नंबर 2697किताब 53, नंबर 7
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ فِيهِ فَهُوَ رَدٌّ ‏"‏‏.‏ رَوَاهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ جَعْفَرٍ الْمَخْرَمِيُّ وَعَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ أَبِي عَوْنٍ عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ‏.‏
Narrated Aisha:Allah's Messenger (ﷺ) said, "If somebody innovates something which is not in harmony with the principles of our religion, that thing is rejected

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 53 · Peacemaking

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।