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सहीह बुख़ारी

नंबर 2614

नंबर 2614किताब 51, नंबर 47
حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ مَيْسَرَةَ، قَالَ سَمِعْتُ زَيْدَ بْنَ وَهْبٍ، عَنْ عَلِيٍّ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ أَهْدَى إِلَىَّ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم حُلَّةً سِيَرَاءَ فَلَبِسْتُهَا، فَرَأَيْتُ الْغَضَبَ فِي وَجْهِهِ، فَشَقَقْتُهَا بَيْنَ نِسَائِي‏.‏
Narrated `Ali:The Prophet (ﷺ) gave me a silken dress as a gift and I wore it. When I saw the signs of anger on his face, I cut it into pieces and distributed it among my wives

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 51 · Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।