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सहीह बुख़ारी

नंबर 2604

नंबर 2604किताब 51, नंबर 38
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مُحَارِبٍ، سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ يَقُولُ بِعْتُ مِنَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بَعِيرًا فِي سَفَرٍ، فَلَمَّا أَتَيْنَا الْمَدِينَةَ قَالَ ‏ "‏ ائْتِ الْمَسْجِدَ فَصَلِّ رَكْعَتَيْنِ ‏"‏‏.‏ فَوَزَنَ ـ قَالَ شُعْبَةُ أُرَاهُ فَوَزَنَ لِي فَأَرْجَحَ، فَمَا زَالَ مِنْهَا شَىْءٌ حَتَّى أَصَابَهَا أَهْلُ الشَّأْمِ يَوْمَ الْحَرَّةِ‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:I sold a camel to the Prophet (ﷺ) on one of the journeys. When we reached Medina, he ordered me to go to the Mosque and offer two rak`at. Then he weighed for me (the price of the camel in gold) and gave an extra amount over it. A part of it remained with me till it was taken by the army of Sham on the day of Harra

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 51 · Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।