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सहीह बुख़ारी

नंबर 2585

नंबर 2585किताब 51, नंबर 19
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقْبَلُ الْهَدِيَّةَ وَيُثِيبُ عَلَيْهَا‏.‏ لَمْ يَذْكُرْ وَكِيعٌ وَمُحَاضِرٌ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ‏.‏
Narrated `Aisha:Allah's Messenger (ﷺ) used to accept gifts and used to give something in return

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 51 · Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।