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सहीह बुख़ारी

नंबर 2579

नंबर 2579किताब 51, नंबर 14
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُقَاتِلٍ أَبُو الْحَسَنِ، أَخْبَرَنَا خَالِدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ حَفْصَةَ بِنْتِ سِيرِينَ، عَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ، قَالَتْ دَخَلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَلَى عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ فَقَالَ ‏"‏ عِنْدَكُمْ شَىْءٌ ‏"‏‏.‏ قَالَتْ لاَ، إِلاَّ شَىْءٌ بَعَثَتْ بِهِ أُمُّ عَطِيَّةَ مِنَ الشَّاةِ الَّتِي بُعِثَ إِلَيْهَا مِنَ الصَّدَقَةِ‏.‏ قَالَ ‏"‏ إِنَّهَا قَدْ بَلَغَتْ مَحِلَّهَا ‏"‏‏.‏
Narrated Um 'Atiyya:Once the Prophet (ﷺ) went to `Aisha and asked her whether she had something (to eat). She said that she had nothing except the mutton which Um 'Atiyya had sent to (Barirah) in charity. The Prophet (ﷺ) said that it had reached its destination (i.e. it is no longer an object of charity)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 51 · Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।