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सहीह बुख़ारी

नंबर 2576

नंबर 2576किताब 51, नंबर 11
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ، حَدَّثَنَا مَعْنٌ، قَالَ حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ طَهْمَانَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ زِيَادٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏إِذَا أُتِيَ بِطَعَامٍ سَأَلَ عَنْهُ أَهَدِيَّةٌ أَمْ صَدَقَةٌ فَإِنْ قِيلَ صَدَقَةٌ‏.‏ قَالَ لأَصْحَابِهِ كُلُوا‏.‏ وَلَمْ يَأْكُلْ، وَإِنْ قِيلَ هَدِيَّةٌ‏.‏ ضَرَبَ بِيَدِهِ صلى الله عليه وسلم فَأَكَلَ مَعَهُمْ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Whenever a meal was brought to Allah's Messenger (ﷺ), he would ask whether it was a gift or Sadaqa (something given in charity). If he was told that it was Sadaqa, he would tell his companions to eat it, but if it was a gift, he would hurry to share it with them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 51 · Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।