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सहीह बुख़ारी

नंबर 2574

नंबर 2574किताब 51, नंबर 9
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ النَّاسَ، كَانُوا يَتَحَرَّوْنَ بِهَدَايَاهُمْ يَوْمَ عَائِشَةَ، يَبْتَغُونَ بِهَا ـ أَوْ يَبْتَغُونَ بِذَلِكَ ـ مَرْضَاةَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Aisha:The people used to look forward for the days of my (`Aisha's) turn to send gifts to Allah's Messenger (ﷺ) in order to please him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 51 · Gifts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।