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सहीह बुख़ारी

नंबर 2562

नंबर 2562किताब 50, नंबर 3
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ أَرَادَتْ عَائِشَةُ أُمُّ الْمُؤْمِنِينَ أَنْ تَشْتَرِيَ جَارِيَةً لِتُعْتِقَهَا، فَقَالَ أَهْلُهَا عَلَى أَنَّ وَلاَءَهَا لَنَا‏.‏ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ يَمْنَعُكِ ذَلِكِ، فَإِنَّمَا الْوَلاَءُ لِمَنْ أَعْتَقَ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin `Umar:Aisha wanted to buy a slave-girl in order to manumit her. The girl's masters stipulated that her Wala' would be for them. Allah's Messenger (ﷺ) said (to `Aisha), "What they stipulate should not stop you, for the Wala' is for the liberator

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · Makaatib

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।