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सहीह बुख़ारी

नंबर 261

नंबर 261किताब 5, नंबर 14
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ، أَخْبَرَنَا أَفْلَحُ، عَنِ الْقَاسِمِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كُنْتُ أَغْتَسِلُ أَنَا وَالنَّبِيُّ، صلى الله عليه وسلم مِنْ إِنَاءٍ وَاحِدٍ تَخْتَلِفُ أَيْدِينَا فِيهِ‏.‏
Narrated Aisha:The Prophet (ﷺ) and I used to take a bath from a single pot of water and our hands used to go in the pot after each other in turn

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · Bathing (Ghusl)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।