सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 2552

नंबर 2552किताब 49, नंबर 35
حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ يُحَدِّثُ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ لاَ يَقُلْ أَحَدُكُمْ أَطْعِمْ رَبَّكَ، وَضِّئْ رَبَّكَ، اسْقِ رَبَّكَ‏.‏ وَلْيَقُلْ سَيِّدِي مَوْلاَىَ‏.‏ وَلاَ يَقُلْ أَحَدُكُمْ عَبْدِي أَمَتِي‏.‏ وَلْيَقُلْ فَتَاىَ وَفَتَاتِي وَغُلاَمِي ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) said, "You should not say, 'Feed your lord (Rabbaka), help your lord in performing ablution, or give water to your lord, but should say, 'my master (e.g. Feed your master instead of lord etc.) (Saiyidi), or my guardian (Maulai), and one should not say, my slave (Abdi), or my girl-slave (Amati), but should say, my lad (Fatai), my lass (Fatati), and 'my boy (Ghulami)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Manumission of Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।