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सहीह बुख़ारी

नंबर 2547

नंबर 2547किताब 49, नंबर 30
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنْ صَالِحٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي مُوسَى الأَشْعَرِيِّ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَيُّمَا رَجُلٍ كَانَتْ لَهُ جَارِيَةٌ فَأَدَّبَهَا فَأَحْسَنَ تَأْدِيبَهَا، وَأَعْتَقَهَا وَتَزَوَّجَهَا، فَلَهُ أَجْرَانِ، وَأَيُّمَا عَبْدٍ أَدَّى حَقَّ اللَّهِ وَحَقَّ مَوَالِيهِ، فَلَهُ أَجْرَانِ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Musa Al-Ash`ari:The Prophet (ﷺ) said, "He who has a slave-girl and teaches her good manners and improves her education and then manumits and marries her, will get a double reward; and any slave who observes Allah's right and his master's right will get a double reward

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Manumission of Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।