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सहीह बुख़ारी

नंबर 2544

नंबर 2544किताब 49, नंबर 27
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، سَمِعَ مُحَمَّدَ بْنَ فُضَيْلٍ، عَنْ مُطَرِّفٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي مُوسَى ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ كَانَتْ لَهُ جَارِيَةٌ فَعَالَهَا، فَأَحْسَنَ إِلَيْهَا ثُمَّ أَعْتَقَهَا وَتَزَوَّجَهَا، كَانَ لَهُ أَجْرَانِ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Musa:Allah's Messenger (ﷺ) said, "He who has a slave-girl and educates and treats her nicely and then manumits and marries her, will get a double reward

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Manumission of Slaves

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।