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सहीह बुख़ारी

नंबर 2503

नंबर 2503किताब 47, नंबर 19
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا جُوَيْرِيَةُ بْنُ أَسْمَاءَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَعْتَقَ شِرْكًا لَهُ فِي مَمْلُوكٍ وَجَبَ عَلَيْهِ أَنْ يُعْتِقَ كُلَّهُ، إِنْ كَانَ لَهُ مَالٌ قَدْرَ ثَمَنِهِ يُقَامُ قِيمَةَ عَدْلٍ وَيُعْطَى شُرَكَاؤُهُ حِصَّتَهُمْ وَيُخَلَّى سَبِيلُ الْمُعْتَقِ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Umar:The Prophet (ﷺ) said, "Whoever manumits his share of a jointly possessed slave, it is imperative on him to manumit the slave completely if he has sufficient money to pay the rest of its price which is to be estimated justly. He should pay his partners their shares and release him (the freed one)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Partnership

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।