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सहीह बुख़ारी

नंबर 2496

नंबर 2496किताब 47, नंबर 14
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَضَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِالشُّفْعَةِ فِي كُلِّ مَا لَمْ يُقْسَمْ، فَإِذَا وَقَعَتِ الْحُدُودُ وَصُرِّفَتِ الطُّرُقُ فَلاَ شُفْعَةَ‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:The Prophet (ﷺ) said, "The right of preemption is valid in every joint property, but when the land is divided and the way is demarcated, then there is no right of pre-emption

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Partnership

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।