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सहीह बुख़ारी

नंबर 2487

नंबर 2487किताब 47, नंबर 5
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُثَنَّى، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ، حَدَّثَنِي ثُمَامَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَنَسٍ، أَنَّ أَنَسًا، حَدَّثَهُ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ ـ رضى الله عنه ـ كَتَبَ لَهُ فَرِيضَةَ الصَّدَقَةِ الَّتِي فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ وَمَا كَانَ مِنْ خَلِيطَيْنِ فَإِنَّهُمَا يَتَرَاجَعَانِ بَيْنَهُمَا بِالسَّوِيَّةِ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:that Abu Bakr As-Siddiq wrote to him the law of Zakat which was made obligatory by Allah's Apostle. He wrote: 'Partners possessing joint property (sheep) have to pay its Zakat equally

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Partnership

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।