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सहीह बुख़ारी

नंबर 2467

नंबर 2467किताब 46, नंबर 28
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ أَشْرَفَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَلَى أُطُمٍ مِنْ آطَامِ الْمَدِينَةِ ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ هَلْ تَرَوْنَ مَا أَرَى إِنِّي أَرَى مَوَاقِعَ الْفِتَنِ خِلاَلَ بُيُوتِكُمْ كَمَوَاقِعِ الْقَطْرِ ‏"‏‏.‏
Narrated Usama bin Zaid:Once the Prophet (ﷺ) stood at the top of one of the castles (or higher buildings) of Medina and said, "Do you see what I see? No doubt I am seeing the spots of afflictions amongst your houses as numerous as the spots where raindrops fall (during a heavy rain). (See Hadith No)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Oppressions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।