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सहीह बुख़ारी

नंबर 2460

नंबर 2460किताब 46, नंबर 21
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، حَدَّثَنِي عُرْوَةُ، أَنَّ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ جَاءَتْ هِنْدُ بِنْتُ عُتْبَةَ بْنِ رَبِيعَةَ، فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أَبَا سُفْيَانَ رَجُلٌ مِسِّيكٌ، فَهَلْ عَلَىَّ حَرَجٌ أَنْ أُطْعِمَ مِنَ الَّذِي لَهُ عِيَالَنَا فَقَالَ ‏ "‏ لاَ حَرَجَ عَلَيْكِ أَنْ تُطْعِمِيهِمْ بِالْمَعْرُوفِ ‏"‏‏.‏
Narrated Aisha:Hind bint `Utba (Abu Sufyan's wife) came and said, "O Allah's Messenger (ﷺ)! Abu Sufyan is a miser. Is there any harm if I spend something from his property for our children?" He said, there is no harm for you if you feed them from it justly and reasonably (with no extravagance)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Oppressions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।