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सहीह बुख़ारी

नंबर 2450

नंबर 2450किताब 46, नंबर 11
حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها – ‏{‏وَإِنِ امْرَأَةٌ خَافَتْ مِنْ بَعْلِهَا نُشُوزًا أَوْ إِعْرَاضًا‏}‏ قَالَتِ الرَّجُلُ تَكُونُ عِنْدَهُ الْمَرْأَةُ، لَيْسَ بِمُسْتَكْثِرٍ مِنْهَا، يُرِيدُ أَنْ يُفَارِقَهَا، فَتَقُولُ أَجْعَلُكَ مِنْ شَأْنِي فِي حِلٍّ‏.‏ فَنَزَلَتْ هَذِهِ الآيَةُ فِي ذَلِكَ‏.‏
Narrated Aisha:Regarding the explanation of the following verse:-- "If a wife fears Cruelty or desertion On her husband's part." (4.128) A man may dislike his wife and intends to divorce her, so she says to him, "I give up my rights, so do not divorce me." The above verse was revealed concerning such a case

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Oppressions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।