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सहीह बुख़ारी

नंबर 2448

नंबर 2448किताब 46, नंबर 9
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ بْنُ إِسْحَاقَ الْمَكِّيُّ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيْفِيٍّ، عَنْ أَبِي مَعْبَدٍ، مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم بَعَثَ مُعَاذًا إِلَى الْيَمَنِ، فَقَالَ ‏ "‏ اتَّقِ دَعْوَةَ الْمَظْلُومِ، فَإِنَّهَا لَيْسَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ اللَّهِ حِجَابٌ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:The Prophet (ﷺ) sent Mu`adh to Yemen and said, "Be afraid, from the curse of the oppressed as there is no screen between his invocation and Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Oppressions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।