सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 2444

नंबर 2444किताब 46, नंबर 5
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ انْصُرْ أَخَاكَ ظَالِمًا أَوْ مَظْلُومًا ‏"‏‏.‏ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذَا نَنْصُرُهُ مَظْلُومًا، فَكَيْفَ نَنْصُرُهُ ظَالِمًا قَالَ ‏"‏ تَأْخُذُ فَوْقَ يَدَيْهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:Allah's Messenger (ﷺ) said, "Help your brother, whether he is an oppressor or he is an oppressed one. People asked, "O Allah's Messenger (ﷺ)! It is all right to help him if he is oppressed, but how should we help him if he is an oppressor?" The Prophet (ﷺ) said, "By preventing him from oppressing others

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Oppressions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।