सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 2401

नंबर 2401किताब 43, नंबर 17
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم رَجُلٌ يَتَقَاضَاهُ فَأَغْلَظَ لَهُ فَهَمَّ بِهِ أَصْحَابُهُ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ دَعُوهُ فَإِنَّ لِصَاحِبِ الْحَقِّ مَقَالاً ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:A man came to the Prophet (ﷺ) and demanded his debts and used harsh words. The companions of the Prophet wanted to harm him, but the Prophet (ﷺ) said, "Leave him, as the creditor (owner of the right) has the right to speak

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Loans, Payment of Loans, Freezing of Property, Bankruptcy

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।