حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ شَبِيبِ بْنِ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ يُونُسَ، قَالَ ابْنُ شِهَابٍ حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، قَالَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " لَوْ كَانَ لِي مِثْلُ أُحُدٍ ذَهَبًا، مَا يَسُرُّنِي أَنْ لاَ يَمُرَّ عَلَىَّ ثَلاَثٌ وَعِنْدِي مِنْهُ شَىْءٌ، إِلاَّ شَىْءٌ أُرْصِدُهُ لِدَيْنٍ ". رَوَاهُ صَالِحٌ وَعُقَيْلٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ.
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "If I had gold equal to the mountain of Uhud, it would not please me that it should remain with me for more than three days, except an amount which I would keep for repaying debts
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।