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सहीह बुख़ारी

नंबर 2334

नंबर 2334किताब 41, नंबर 15
حَدَّثَنَا صَدَقَةُ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ عُمَرُ ـ رضى الله عنه ـ لَوْلاَ آخِرُ الْمُسْلِمِينَ مَا فَتَحْتُ قَرْيَةً إِلاَّ قَسَمْتُهَا بَيْنَ أَهْلِهَا كَمَا قَسَمَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم خَيْبَرَ‏.‏
Narrated Zaid bin Aslam from his father:`Umar said, "But for the future Muslim generations, I would have distributed the land of the villages I conquer among the soldiers as the Prophet (ﷺ) distributed the land of Khaibar

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · Agriculture

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।