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सहीह बुख़ारी

नंबर 190

नंबर 190किताब 4, नंबर 56
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ يُونُسَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، عَنِ الْجَعْدِ، قَالَ سَمِعْتُ السَّائِبَ بْنَ يَزِيدَ، يَقُولُ ذَهَبَتْ بِي خَالَتِي إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ، إِنَّ ابْنَ أُخْتِي وَجِعٌ‏.‏ فَمَسَحَ رَأْسِي وَدَعَا لِي بِالْبَرَكَةِ، ثُمَّ تَوَضَّأَ فَشَرِبْتُ مِنْ وَضُوئِهِ، ثُمَّ قُمْتُ خَلْفَ ظَهْرِهِ، فَنَظَرْتُ إِلَى خَاتَمِ النُّبُوَّةِ بَيْنَ كَتِفَيْهِ مِثْلِ زِرِّ الْحَجَلَةِ‏.‏
जाद से रिवायत है वह कहते हैं कि मैंने साइब बिन यज़ीद रज़ियल्लाहु अन्हु को कहते हुए सुना है, उन्होंने फ़रमाया कि मेरी ख़ाला मुझे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास ले गयीं और कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ! मेरा भान्जा बीमार है, तो आपने मेरे सर पर हाथ फेरा और मेरे लिए बरकत की दुआ फरमायी । फिर आपने वुज़ू फरमाया और मैंने आपके वुज़ू का बचा हुआ पानी पी लिया । फिर मैं आपकी पीठ के पीछे खड़ा हुआ और नबूवत की मोहर को देखा जो आपके दोनों कन्धों के बीच फ़ाख्ता के अंडे की तरह थी ।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 4 · Ablutions (Wudu')

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।