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सहीह बुख़ारी

नंबर 2257

नंबर 2257किताब 36, नंबर 1
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَضَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالشُّفْعَةِ فِي كُلِّ مَا لَمْ يُقْسَمْ، فَإِذَا وَقَعَتِ الْحُدُودُ وَصُرِّفَتِ الطُّرُقُ فَلاَ شُفْعَةَ‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:Allah's Messenger (ﷺ) gave a verdict regarding Shuf'a in every undivided joint thing (property). But if the limits are defined (or demarcated) or the ways and streets are fixed, then there is no pre-emption

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Shuf'a

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।