حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ هِنْدٌ أُمُّ مُعَاوِيَةَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِنَّ أَبَا سُفْيَانَ رَجُلٌ شَحِيحٌ، فَهَلْ عَلَىَّ جُنَاحٌ أَنْ آخُذَ مِنْ مَالِهِ سِرًّا قَالَ " خُذِي أَنْتِ وَبَنُوكِ مَا يَكْفِيكِ بِالْمَعْرُوفِ ".
Narrated `Aisha:Hind, the mother of Mu'awiya said to Allah's Messenger (ﷺ), "Abu Sufyan (her husband) is a miser. Am I allowed to take from his money secretly?" The Prophet (ﷺ) said to her, "You and your sons may take what is sufficient reasonably and fairly
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।