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सहीह बुख़ारी

नंबर 2208

नंबर 2208किताब 34, नंबर 154
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ بَيْعِ ثَمَرِ التَّمْرِ حَتَّى تَزْهُوَ‏.‏ فَقُلْنَا لأَنَسٍ مَا زَهْوُهَا قَالَ تَحْمَرُّ وَتَصْفَرُّ، أَرَأَيْتَ إِنْ مَنَعَ اللَّهُ الثَّمَرَةَ بِمَ تَسْتَحِلُّ مَالَ أَخِيكَ
Narrated Humaid:Anas said, "The Prophet (ﷺ) forbade the selling of dates till they were almost ripe." We asked Anas, "What does 'almost ripe' mean?" He replied, "They get red and yellow. The Prophet (ﷺ) added, 'If Allah destroyed the fruits present on the trees, what right would the seller have to take the money of his brother (somebody else)?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Sales and Trade

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।