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सहीह बुख़ारी

नंबर 2190

नंबर 2190किताब 34, नंबर 137
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ، قَالَ سَمِعْتُ مَالِكًا، وَسَأَلَهُ، عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ الرَّبِيعِ أَحَدَّثَكَ دَاوُدُ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم رَخَّصَ فِي بَيْعِ الْعَرَايَا فِي خَمْسَةِ أَوْسُقٍ أَوْ دُونَ خَمْسَةِ أَوْسُقٍ قَالَ نَعَمْ‏.‏
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) allowed the sale of the dates of 'Araya provided they were about five Awsuq (singular: Wasaq which means sixty Sa's) or less (in amount)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Sales and Trade

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।