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सहीह बुख़ारी

नंबर 2129

नंबर 2129किताब 34, नंबर 81
حَدَّثَنَا مُوسَى، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ يَحْيَى، عَنْ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ الأَنْصَارِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَنَّ إِبْرَاهِيمَ حَرَّمَ مَكَّةَ، وَدَعَا لَهَا، وَحَرَّمْتُ الْمَدِينَةَ كَمَا حَرَّمَ إِبْرَاهِيمُ مَكَّةَ، وَدَعَوْتُ لَهَا فِي مُدِّهَا وَصَاعِهَا، مِثْلَ مَا دَعَا إِبْرَاهِيمُ ـ عَلَيْهِ السَّلاَمُ ـ لِمَكَّةَ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin Zaid:The Prophet (ﷺ) said, "The Prophet Abraham (ﷺ) made Mecca a sanctuary, and asked for Allah's blessing in it. I made Medina a sanctuary as Abraham made Mecca a sanctuary and I asked for Allah's Blessing in its measures the Mudd and the Sa as Abraham did for Mecca

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Sales and Trade

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।