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सहीह बुख़ारी

नंबर 2102

नंबर 2102किताब 34, नंबर 55
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ حَجَمَ أَبُو طَيْبَةَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَأَمَرَ لَهُ بِصَاعٍ مِنْ تَمْرٍ، وَأَمَرَ أَهْلَهُ أَنْ يُخَفِّفُوا مِنْ خَرَاجِهِ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:Abu Taiba cupped Allah's Messenger (ﷺ) so he ordered that he be paid one Sa of dates and ordered his masters to reduce his tax (as he was a slave and had to pay a tax to them)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Sales and Trade

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।