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सहीह बुख़ारी

नंबर 2083

नंबर 2083किताब 34, नंबर 36
حَدَّثَنَا آدَمُ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدٌ الْمَقْبُرِيُّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَيَأْتِيَنَّ عَلَى النَّاسِ زَمَانٌ لاَ يُبَالِي الْمَرْءُ بِمَا أَخَذَ الْمَالَ، أَمِنْ حَلاَلٍ أَمْ مِنْ حَرَامٍ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Hurairah (ra):The Prophet (ﷺ) said "Certainly a time will come when people will not bother to know from where they earned the money, by lawful means or unlawful means." (See Hadith no)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Sales and Trade

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।