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सहीह बुख़ारी

नंबर 2057

नंबर 2057किताब 34, नंबर 11
حَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ الْمِقْدَامِ الْعِجْلِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الطُّفَاوِيُّ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ،، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ قَوْمًا، قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ، إِنَّ قَوْمًا يَأْتُونَنَا بِاللَّحْمِ لاَ نَدْرِي أَذَكَرُوا اسْمَ اللَّهِ عَلَيْهِ أَمْ لاَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ سَمُّوا اللَّهَ عَلَيْهِ وَكُلُوهُ ‏"‏‏.‏
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है, वह कहती हैं कि कुछ लोगों ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! कुछ लोग हमारे पास मांस लाते हैं, लेकिन हमें मालूम नहीं होता कि उन्होंने ज़बह करते समय बिस्मिल्लाह कहा है या नहीं। यह सुन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “तुम उसपर बिस्मिल्लाह कहो और खा लो।”

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 34 · Sales and Trade

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।