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सहीह बुख़ारी

नंबर 2055

नंबर 2055किताब 34, नंबर 9
حَدَّثَنَا قَبِيصَةُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ طَلْحَةَ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ مَرَّ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِتَمْرَةٍ مَسْقُوطَةٍ فَقَالَ ‏"‏ لَوْلاَ أَنْ تَكُونَ صَدَقَةً لأَكَلْتُهَا ‏"‏‏.‏ وَقَالَ هَمَّامٌ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ أَجِدُ تَمْرَةً سَاقِطَةً عَلَى فِرَاشِي ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:The Prophet (ﷺ) passed by a fallen date and said, "Were it not for my doubt that this might have been given in charity, I would have eaten it." And narrated Abu Huraira the Prophet (ﷺ) said, "I found a datefruit fallen on my bed

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Sales and Trade

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।