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सहीह बुख़ारी

नंबर 2050

नंबर 2050किताब 34, नंबर 4
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ كَانَتْ عُكَاظٌ وَمِجَنَّةُ وَذُو الْمَجَازِ أَسْوَاقًا فِي الْجَاهِلِيَّةِ، فَلَمَّا كَانَ الإِسْلاَمُ فَكَأَنَّهُمْ تَأَثَّمُوا فِيهِ فَنَزَلَتْ ‏{‏لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَنْ تَبْتَغُوا فَضْلاً مِنْ رَبِّكُمْ ‏}‏ فِي مَوَاسِمِ الْحَجِّ، قَرَأَهَا ابْنُ عَبَّاسٍ‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:`Ukaz, Majanna and Dhul-Majaz were marketplaces in the Pre-Islamic period of ignorance. When Islam came, Muslims felt that marketing there might be a sin. So, the Divine Inspiration came: "There is no harm for you to seek the bounty of your Lord (in the seasons of Hajj)." (2.198) Ibn `Abbas recited the Verse in this way

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Sales and Trade

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।