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सहीह बुख़ारी

नंबर 2043

नंबर 2043किताब 33, नंबर 18
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ عُمَرَ ـ رضى الله عنه ـ نَذَرَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ أَنْ يَعْتَكِفَ فِي الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ـ قَالَ أُرَاهُ قَالَ ـ لَيْلَةً قَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَوْفِ بِنَذْرِكَ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Umar:that `Umar had vowed in the Pre-Islamic period to perform I`tikaf in Al-Masjid-al-Haram. (A subnarrator thinks that `Umar vowed to perform I`tikaf for one night.) Allah's Messenger (ﷺ) said to `Umar, "Fulfill your vow

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Retiring to a Mosque for Remembrance of Allah (I'tikaf)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।