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सहीह बुख़ारी

नंबर 2005

नंबर 2005किताब 30, नंबर 110
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ أَبِي عُمَيْسٍ، عَنْ قَيْسِ بْنِ مُسْلِمٍ، عَنْ طَارِقِ بْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي مُوسَى ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كَانَ يَوْمُ عَاشُورَاءَ تَعُدُّهُ الْيَهُودُ عِيدًا، قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ فَصُومُوهُ أَنْتُمْ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Musa:The day of 'Ashura' was considered as `Id day by the Jews. So the Prophet (ﷺ) ordered, "I recommend you (Muslims) to fast on this day

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।