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सहीह बुख़ारी

नंबर 1989

नंबर 1989किताब 30, नंबर 96
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمَانَ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ ـ أَوْ قُرِئَ عَلَيْهِ ـ قَالَ أَخْبَرَنِي عَمْرٌو، عَنْ بُكَيْرٍ، عَنْ كُرَيْبٍ، عَنْ مَيْمُونَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ النَّاسَ، شَكُّوا فِي صِيَامِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ عَرَفَةَ، فَأَرْسَلَتْ إِلَيْهِ بِحِلاَبٍ وَهْوَ وَاقِفٌ فِي الْمَوْقِفِ، فَشَرِبَ مِنْهُ، وَالنَّاسُ يَنْظُرُونَ‏.‏
Narrated Maimuna:The people doubted whether the Prophet (ﷺ) was fasting on the day of `Arafat or not, so I sent milk while he was standing at `Arafat, he drank it and the people were looking at him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।