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सहीह बुख़ारी

नंबर 1950

नंबर 1950किताब 30, नंबर 57
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، قَالَ سَمِعْتُ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ تَقُولُ كَانَ يَكُونُ عَلَىَّ الصَّوْمُ مِنْ رَمَضَانَ، فَمَا أَسْتَطِيعُ أَنْ أَقْضِيَ إِلاَّ فِي شَعْبَانَ‏.‏ قَالَ يَحْيَى الشُّغْلُ مِنَ النَّبِيِّ أَوْ بِالنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated `Aisha:Sometimes I missed some days of Ramadan, but could not fast in lieu of them except in the month of Sha'ban." Said Yahya, a sub-narrator, "She used to be busy serving the Prophet (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।