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सहीह बुख़ारी

नंबर 1946

नंबर 1946किताब 30, नंबर 53
حَدَّثَنَا آدَمُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الأَنْصَارِيُّ، قَالَ سَمِعْتُ مُحَمَّدَ بْنَ عَمْرِو بْنِ الْحَسَنِ بْنِ عَلِيٍّ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهم ـ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي سَفَرٍ، فَرَأَى زِحَامًا، وَرَجُلاً قَدْ ظُلِّلَ عَلَيْهِ، فَقَالَ ‏"‏ مَا هَذَا ‏"‏‏.‏ فَقَالُوا صَائِمٌ‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ لَيْسَ مِنَ الْبِرِّ الصَّوْمُ فِي السَّفَرِ ‏"‏‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:Allah's Messenger (ﷺ) was on a journey and saw a crowd of people, and a man was being shaded (by them). He asked, "What is the matter?" They said, "He (the man) is fasting." The Prophet (ﷺ) said, "It is not righteousness that you fast on a journey

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।