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सहीह बुख़ारी

नंबर 1944

नंबर 1944किताब 30, नंबर 51
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَرَجَ إِلَى مَكَّةَ فِي رَمَضَانَ فَصَامَ حَتَّى بَلَغَ الْكَدِيدَ أَفْطَرَ، فَأَفْطَرَ النَّاسُ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ اللَّهِ وَالْكَدِيدُ مَاءٌ بَيْنَ عُسْفَانَ وَقُدَيْدٍ‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:Allah's Messenger (ﷺ) set out for Mecca in Ramadan and he fasted, and when he reached Al-Kadid, he broke his fast and the people (with him) broke their fast too. (Abu `Abdullah said, "Al-Kadid is a land covered with water between Usfan and Qudaid)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।